केंद्र और राज्य सरकारों की कड़ी कार्रवाई, सेबी, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की अति सक्रियता के बावजूद बंगाल में एक शारदा समूह को ठोड़ बाकी सैकड़ों चिटफंड कंपनियां धड़ल्ले से कारोबार कर रही है। फिल्मों,खेल और मीडिया पर उनके अंधाधुंध निवेश पर जरुर अंकुश लगा है। जिससे फिल्म ,खेल और चिटफंड पोषित माडिया के यहां भले अंधेरा हो, लेकिन पोंजी स्कीम की दिवाली जारी है। फिरभी नई जीवन बीमा पॉलिसियां और म्युचुअल फंड के काफी ज्यादा ग्राहक बंगाल में ही हैं।
तृणमूल कांग्रेस के नेता सोमेन मित्रा ने वर्ष 2011 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। देश में नई जीवन बीमा पॉलिसियां और म्युचुअल फंड के सबसे ज्यादा ग्राहक बंगाल में ही हैं। शारदा फर्जीवाड़े के भंडाफोड़ के बाद आम निवेशक दुबारा बैंकों, डाकघरों और जीवन बीमा निगम के दरवाजे पर दस्तक देने लगे थे। लेकिन अब हालत ऐसी बन रही है कि चिटफंड कंपनियों से भले ही कोई बच निकले, बाजार से नत्थी हुए जीवनबीमा निगम से बचना मुश्किल है। नई पालिसियों से वायदे के मुताबिक कई गुणा फायदा तो दूर प्रीमियम की रकम तक वापस नहीं मिल रही है। जरुरत के वक्त बेवक्त शेयर बाजार की उछाल के हिसाब से रकम निकाली नहीं कि सत्यानाश।कोबरापोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में देश के कई सरकारी और निजी बैंकों द्वारा धन की हेराफेरी तथा अन्य गलत गतिविधियों में लिप्त बताया है और इस सूची में भारतीय स्टेट बैंक और जीवन बीमा निगम को भी शामिल किया है! भारतीय वित्तीय संस्थानों में राष्ट्रीयकृत स्टेट बैंक आफ इंडिया, सरकारी उपक्रम जीवन बीमा निगम और डाकघरों की साख अब भी अटूट है। पर बंगाल में चिटफंड कंपनियों की मेहरबानी से जीवन बीमा निगम की साख को भी धक्का लगा है।क्योंकि जीवन बीमा निगम के कर्मचारी और एजेंट चिटपंड कंपनियों के लिए काम करते रहे हैं। एलआईसी की साख का इन चिटफंड कंपनियों ने खूब इस्तेमाल किया। आम ग्राहकों का बारह बजाने वाली ताजा खबर तो यह है कि एचयूएल के बायबैक से एलआईसी के पास काफी रकम आने की उम्मीद है। एलआईसी यह रकम बाजार में लगाती है तो इससे बाजारों को फौरी तौर पर बड़ा सहारा मिलेगा। हालांकि हालातों को देखते हुए लगता है लंबी अवधि में भी निफ्टी 5,400-6,000 के दायरे में ही घूमता नजर आएगा। भारत सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में जीवन बीमा निगम और स्टेट बैंक की पूंजीखपायी जा रही है।जीवन बीमा निगम के चेयरमैं ेसके राय ने कहा है कि जीवन बीमा निगम चालू वित्तीय वर्ष में शेयरों और कर्ज प्रतिभूतियों में 2.5 लाख करोड़ का निवेश करेगी!वहीं अब फूड सिक्योरिटी अध्यादेश लाकर सरकार भले ही अपना राजनीतिक उल्लू सीधा कर रही हो लेकिन इसका खामियाजा बाजार को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि फूड सिक्योरिटी अध्यादेश से सरकारी खजाने पर अनुमानित करीब 1.25 लाख करोड रुपये अतिरिक्त सब्सिडी बोझ पड़ेगा। वहीं आगे चलकर सब्सिडी का ये अनुमानित बोझ इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। इसका बोझ भी एसबीआई और एलाईसी पर लदला तय ह। भारत सरकार की नजर कोलइंडिया की नकदी पर भी है।
Found Origina post here : http://www.mlmharkhabar.com/2013/07/life-insurance-scam.html
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Mr. Abhishek
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